फ़रवरी 12, 2020

खुशी क्या है?

हिंदी कविता Hindi Kavita खुशी क्या है? What is happiness?

खुशी क्या है?


एक भावना, एक जज़्बात |



सूर्य की किरणों में,


चाँद की शीतलता में,


चिड़ियों की चहचहाट में,


सावन की बरसात में |



किसीकी मुस्कान में छुपी,


किन्ही आँखों में बसी,


कहीं होठों पे खिली,


कभी फूलों से मिली |



मेहनत में कामयाबी में,


गुलामी से आज़ादी में,


हार के बाद जीत में,


जीवन की हर रीत में |



कभी मीठी-मीठी बातों में,


कहीं छुप-छुप के मुलाकातों में,


कभी यारों की बारातों में,


कभी संगी संग रातों में |



पर मेरी खुशी?


तेरा साथ निभाने में,


तेरा हाथ बंटाने में,


बच्चे को खिलाने में,


कभी-कभी गुदगुदाने में,


मेरा जितना भी वक्त है,


तुम दोनों संग बिताने में ||

फ़रवरी 08, 2020

सुहागरात

हिंदी कविता Hindi Kavita सुहागरात Suhagraat

कजरारे नयनों वाली,


होठों पर गहरी लाली,


माथे पर सिन्दूरी टीका,


कानों में पहने बाली ।



शर्मीले नयनों वाली,


अधरों पर संकुचित वाणी,


श्वास में भय का डेरा,


मन सोचे क्या होगा तेरा,


कर में है दूध का प्याला,


थम-थम कर बढ़ने वाली ।



प्यासे नयनों वाली,


लब पर गहराई लाली,


प्याला अब ख़ाली पड़ा है,


तकिया भी नीचे गिरा है,


श्वासों में तेज़ी बड़ी है,


पिया से मिलन की घड़ी है,


पिया के साथ की खातिर,


धन-मन-तन लुटाने वाली ।।

फ़रवरी 03, 2020

भोर

हिंदी कविता Hindi Kavita भोर Bhor

निशा की अंतिम वेला है,


जगमग-जगमग टिमटिम तारे,


चंद्र लुप्त है, लोप है जीवन,


सुप्त हैं स्वप्नशय्या पर सारे |



सुर्ख रवि की महिमा देखो,


उषा का है हुआ आगमन,


चढ़ते सूर्य की ऊष्मा से,


तिमिर का अब होगा गमन |



पहली किरण के साथ ही,


गूँजे चहुँ ओर मुर्गे की बांग,


कोयल कूके मयूर नाचे,


गिलहरियाँ मारे टहनियों पर छलांग |



गूँज उठे हैं मंदिर में शंख,


पढ़ी जाने मस्ज़िदों में अज़ान,


बजने लगी गिरजाघर की घंटियां,


गुरूद्वारे में गुरुबाणी का गान |



दिनचर निकले स्वप्नलोक से,


निशाचर स्वप्न में समाए,


जीवन जाग्रत होता जगत में,


जब तम पर प्रकाश फ़तेह पाए |



पशु पक्षी सब जीव मनुष्य,


प्रकृति के सारे वरदान,


शीश झुकाकर करें नमन सब,


नभ पर दिनकर शोभायमान ||

जनवरी 29, 2020

बचपन

हिंदी कविता Hindi Kavita बचपन Bachpan

मासूम चेहरा मुलायम गाल,


छोटी-छोटी आँखें उलझे बाल,


नन्ही उंगलियाँ छोटी सी हथेली,


नन्हे-नन्हे पैर मस्तानी चाल |



कभी करे प्यार कभी मुस्काए,


कभी तो रूठ के दूर भाग जाए,


कभी माँगे मीठा कभी खिलौना,


कभी मेरी गोदी में समाए |



अद्भुत अनोखा चंचल बचपन,


सुख के रंगों में रंगा यह जीवन,


माँ-बाप की आँखों का तारा,


बालक मेरा सबसे प्यारा ||

जनवरी 26, 2020

गणतंत्र दिवस परेड

हिंदी कविता Hindi Kavita गणतंत्र दिवस परेड Republic Day Parade

राजभवन से चला काफ़िला,


जनप्रतिनिधियों को लेकर,


चला वहाँ जहाँ जलती है,


अजर अमर नित्य एक ज्वाला,


जहाँ जीवंत हो उठती है,


वीरों की अगणित गाथा |



शीश झुकाकर किया नमन,


याद किया कुर्बानियों को,


माताओं के बलिदानों को,


यतीमों के रुदानों को,


रणबाँकुरे सेनानियों की स्मृति में,


झुक गया हर शीश हर माथा |



देखो फहराया गया तिरंगा,


गूँज उठा है राष्ट्रगान,


खड़े हुए हैं चहुँ ओर दर्शक,


देने तिरंगे को सम्मान,


गूँज उठी हैं 21 तोपें,


जैसे सिंह वन में गर्जाता |



हुआ शूरवीरों का सम्मान,


कईयों का जीते-जी कुछ का मरणोपरांत,


पर जीवित रहता है इनसे ही,


हम देशवासियों का अभिमान,


जीवित रहेंगे ये वीर भी तब तक,


जब तक इनकी वीरगाथा जन-जन है सुनाता |



देखो देखो सेना आई,


सैन्यशक्ति पथ पर दर्शायी,


थल-जल-वायु का यह मेला,


जन-जन का वक्ष गर्व से सुजाता,


पर चार चाँद लगाने इस दल को,


देखो ऊंटों का दस्ता आता |



सजी झांकियां सजे बहु जन हैं,


हुआ इनपर व्यय बहु धन है,


फिर भी लूटा इनने सबका मन है,


शोभायमान इन झांकियों से,


राजपथ पर बस इक दिन,


संपूर्ण भारतवर्ष है छा जाता |



देखो वीर बालक आए,


गजराज पथ पर हैं छाए,


कुछ साहसी मानवों ने,


मोटर-साइकिल पर करतब दिखाए,


गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर,


गौरवान्वित होती भारतमाता ||

जनवरी 24, 2020

उफ़ यह अदा

हिंदी कविता Hindi Kavita उफ़ यह अदा Uff yeh adaa

लचकाती कमर,


मृगनयनी नयन,


झूलती लटें,


सकुचाता बदन |



प्यासे अधर,


लल्साती मुस्कान,


सुशोभित हैं तन पर,


कौमार्य के सारे वरदान |



उफ़ यह अदा,


उफ़ यह बदन,


चाहे मेरा दिल,


पाना तेरी छुअन ||

जनवरी 20, 2020

माया

हिंदी कविता Hindi Kavita माया Maaya

धन की क्या आवश्यकता है? धन सिर्फ एक छलावा है | मोह है | माया है | सत्य की परछाईं मात्र है, जो सिर्फ अंधकार में दिखाई पड़ती है | उजाले में इसका कोई अस्तित्व नहीं | धन सब परेशानियों की जड़ है | सब अपराधों की जननी है | सब व्यसनों का आरम्भ है |


कुदरत ने सब जीव बनाए,

पशु पक्षी मत्स्य तरु,

जल भूमि गिरी आकाश,

कंद मूल फल फूल खिलाए,

अंधकार से दिया प्रकाश ||


पर मनुष्य, तूने क्या दिया?


लोभ मोह दंभ अहंकार,

भेदभाव ऊँच-नीच तकरार !

धन को सर्वोपरि बनाया,

धनी निर्धन में भेद कराया,

माया के इस पाश में फंसकर,

कुदरत को तू समझ न पाया ||

राम आए हैं