content='width=device-width, initial-scale=1' /> मन के भाव - हिंदी काव्य संकलन: नवंबर 2021

नवंबर 09, 2021

हमने एक बीज बोया था

सूखे निर्जल मरुस्थल में,


मृगतृष्णा के भरम में,


सर्वस्व जब खोया था,


हमने एक बीज बोया था |



जब सपना अपना टूटा था,


अनपेक्षित अंकुर फूटा था,


श्रम से उसको संजोया था,


हमने एक बीज बोया था |



आज मरु पर उपवन छाया है,


जो चाहा था वह पाया है,


फलों से नत लहराया है,


हमने जो बीज बोया था ||

नवंबर 04, 2021

शुभ दीपावली

संत कवि श्रीतुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस से प्रेरित दीपावली के संदर्भ में मेरी चंद पंक्तियाँ -


भ्रमित भटकता हूँ मैं बालक | तुम ही हो जगत के पालक ||


नीच कुटिल है मेरी संगत | माँगू राम नाम की रंगत ||


राम बनो मेरे खेवैया | भवसागर तर जाए नैया ||


दीपक घृत के दिल में जलाऊं | हृदय में श्रीहरि को मैं बसाऊं ||