content='width=device-width, initial-scale=1' /> मन के भाव - हिंदी काव्य संकलन: सितंबर 2020

सितंबर 26, 2020

कोरोना

यह अनजाना अदृश्य शत्रु,

जाने कहाँ से आया है,

सारी मानव सभ्यता पर,

इसके भय का साया है |


थम गया जो दौड़ रहा था,

निरंतर निरंकुश - यह संसार,

अचल हुए जो चलायमान थे,

व्यक्ति वाहन और व्यापार |


संगी-साथी से छूट गया,

दिन-प्रतिदिन का सरोकार,

घर से बाहर अब ना जाए,

सांसारिक मानव बार-बार |


आशंकित भयभीत किंकर्तव्यविमूढ़,

जूझ रहा आदम भरपूर,

क्या कर पाएगा इस आफ़त को,

वह समय रहते दूर ???

सितंबर 08, 2020

नवजीवन

भद्दी नगरीय इमारत पर,


जड़ निष्प्राण ठूँठ पर,


मरु की तपती रेत पर,


गिरी के श्वेत कफ़न पर,


नवजीवन का अंकुर फूटे,


प्रतिकूल पर्यावरण का उपहास कर |