content='width=device-width, initial-scale=1' /> मन के भाव - हिंदी काव्य संकलन Mann ke Bhaav : Hindi Kavita

अक्तूबर 05, 2022

आओ दशहरा मनाएं

हिंदी कविता Hindi Kavita आओ दशहरा मनाएं Aao Dussehra manaayen

कागज़ का पुतला जलाकर,


सदियों की प्रथा निभाकर,


उत्सव हमने मनाया |



भीतर का रावण जलाकर,


राम की सीखें अपनाकर,


आओ दशहरा मनाएं ||


सितंबर 26, 2022

नौ देवियों के नाम और महिमा

हिंदी कविता Hindi Kavita नौ देवियों के नाम और महिमा Nau Deviyon ke Naam aur Mahima


हिमालय के घर की लक्ष्मी,


स्थिरता का आशीष देती,


शैलपुत्री माता की जय |



शिव के तप में तल्लीन,


श्रम का संदेश देती,


ब्रह्मचारिणी माता की जय |



अर्धचन्द्र भाल पर शोभित,


युद्ध को सदैव तत्पर,


चंद्रघंटा माता की जय |



मंद हास से ब्रह्माण्ड रचती,


रोग-शोक को दूर करती,


कूष्माण्डा माता की जय |



कार्तिकेय भगवान की जननी,


माँ की ममता का प्रतीक,


स्कंदमाता की जय |



महर्षि कात्यायन की पुत्री,


दैत्य महिषासुर मर्दिनी,


कात्यायनी माता की जय |



काली रात सा श्याम वर्ण,


शुभंकरी और चामुण्डा,


कालरात्रि माता की जय |



गौर वर्ण शिव अर्धांगिनी,


श्वेत वस्त्र सौम्य स्वरूप,


महागौरी माता की जय |



अष्ट सिद्धियाँ देने वाली,


महाशक्ति महादेवी,


सिद्धिदात्री माता की जय ||

सितंबर 19, 2022

तेरी आँखों का समंदर

हिंदी कविता Hindi Kavita तेरी आँखों का समंदर Teri Aankhon ka samundar


तेरी आँखों के समंदर में डूब जाने को जी करता है,


तेरे नैनों के तीरों से मर जाने को जी करता है ||

सितंबर 16, 2022

रस्ते पर गिरा पेड़

हिंदी कविता Hindi Kavita रस्ते पर गिरा पेड़ Raste par gira ped

वो सड़क जो दो दिलों को जोड़ती थी,


प्रेम की धरा पे जो दौड़ती थी,


आज दो भागों में वो बंट चुकी है,


मौजूद है वहीं मगर कट चुकी है,


अहं का वृक्ष मार्ग पर गिर चुका है,


भावों का आवागमन थम चुका है,


कोई इस तरु को राह से सरकाए,


दो दिलों की दूरियों को भर जाए ?

अगस्त 30, 2022

सुख करता, दुखहर्ता का हिंदी अनुवाद

हिंदी कविता Hindi Kavita सुख करता, दुखहर्ता का हिंदी अनुवाद Sukh karta dukhharta ka Hindi Anuvaad


सुख दाता दुःख हरता विघ्न विनाशक,


कृपासागर रिद्धि-सिद्धिदायक,


सर्वांगीण सुंदर केसरिया विनायक,


कंठ मोतियन की माला धारक,


जय देव, जय देव,


जय देव, जय देव जय मंगल मूरत,


जय मंगल मूरत,


दर्शन मात्र से मनोकामना पूरक |


जय देव, जय देव ||



रत्नजड़ित मुकुट प्रभु चढ़ाऊं,


चन्दन कुमकुम केसर टीका लगाऊं,


हीरों का मुकुट शोभा बढ़ाए,


पायल की रुनझुन मन को सुहाए,


जय देव, जय देव,


जय देव, जय देव जय मंगल मूरत,


जय मंगल मूरत,


दर्शन मात्र से मनोकामना पूरक |


जय देव, जय देव ||



लंबोदर पीतांबर कष्ट निवारक,


वक्रतुंड त्रिनेत्र धारक,


दास के सदन में प्रभु पधारो,


रक्षा करो भक्त वंदन करें सब संकट निवारो,


जय देव, जय देव,


जय देव, जय देव जय मंगल मूरत,


जय मंगल मूरत,


दर्शन मात्र से मनोकामना पूरक |


जय देव, जय देव ||

अगस्त 26, 2022

जीवन की किताब

हिंदी कविता Hindi Kavita जीवन की किताब Jeevan ki Kitaab

इक दिन फुर्सत के क्षणों में,


तन्हा-तन्हा से पलों में,


मैंने मन में झाँककर,


जीवन की किताब खोली |



पहले पन्ने पर दर्ज था,


बड़ा-बड़ा सा अर्ज़ था,


मेरा परिचय, मेरी पहचान,


माँ-बाबा का दिया वो नाम,


जो जीवन का अंग था,


हर किस्से के संग था |



पन्ना-पन्ना मैं बढ़ता गया,


किस्से-कथाएं पढ़ता गया,


कुछ अफ़साने खुशी के थे,


कुछ नीरस से दुःखी से थे,


थोड़ी आशा-निराशा थीं,


कुछ अधूरी अभिलाषा थीं,


कहीं जीत थी कहीं हार थी,


कहीं किस्मत की पतवार थी,


कभी बरखा थी बहार थी,


कभी पतझड़ की बयार थी |



एक विपदाओं की बाढ़ थी,


और ओलों की बौछार थी,


रस्ते पर खड़ी दीवार थी,


लेकिन संग में तलवार थी,


श्रम-संयम जिसकी धार थी,


फ़िर पल में नौका पार थी,


कुछ लाभ था कुछ हानि थी,


ऐसी ढेरों कहानी थीं |



अंतिम कुछ पन्ने कोरे थे,


ना ज़्यादा थे ना थोड़े थे,


कुछ मीठे पल अभी जीने हैं,


कुछ कड़वे घूँट भी पीने हैं,


मैंने कल में झाँककर,


यादों की झोली टटोली ||

अगस्त 13, 2022

ऐ वतन, तेरे लिए

हिंदी कविता Hindi Kavita ऐ वतन तेरे लिए Ae watan tere liye

मस्तक की बूंदों से मैंने,


सींची है तेरी ज़मीन,


मस्तक की सारी बूँदें हैं,


ऐ वतन, तेरे लिए |



लहू की बूंदों से मैंने,


खींची है तेरी सरहद,


रक्त का अंतिम कतरा भी,


ऐ वतन, तेरे लिए |



माथे की लाली को मैंने,


किया तुझपर कुर्बान,


कोख का बालक भी मेरा,


ऐ वतन, तेरे लिए |



वक्त के लम्हों को मैंने,


तेरी सेवा में बिताया,


हर पल हर श्वास मेरी,


ऐ वतन, तेरे लिए ||


आओ दशहरा मनाएं