content='width=device-width, initial-scale=1' /> मन के भाव - हिंदी काव्य संकलन: लोकतंत्र का उत्सव

जनवरी 09, 2022

लोकतंत्र का उत्सव

फ़िर निकले हैं दल-बल लेकर,


चोर-उचक्के और डकैत,


चाहते हैं मायावी कुर्सी,


पाँच साल फ़िर करेंगें ऐश |



मत अपना बहुमूल्य है समझो,


मत करना इन पर बर्बाद,


जाँच-परख कर नेता चुनना,


सुने जो सबकी फ़रियाद ||

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