content='width=device-width, initial-scale=1' /> मन के भाव - हिंदी काव्य संकलन Mann ke Bhaav : Hindi Kavita: क्या पाया, तूने मानव ?

मई 06, 2021

क्या पाया, तूने मानव ?

दो पैरों पर सीधा चलके,


वस्त्रों को धारण करके,


कंदराओं से निकलके,


क्या पाया, तूने मानव ?

 

सरिता में विष मिलाकर,


तरुवर की छाँव मिटाकर,


नगरों में खुद को बसाकर,


क्या पाया, तूने मानव ?

 

निर्बल पर बल चलाकर,


रुधिर को व्यर्थ बहाकर,


दौलत को खूब जुटाकर ,


क्या पाया, तूने मानव ?

 

परमार्थ को भुलाकर,


कुकर्मों को अपनाकर,


दमन के पथ पर जाकर,


क्या पाया, तूने मानव ?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें